धैर्य – करि , बन मत्त दादुर-दल उछल बैठे ॥

स्निग्ध-पथ पर नोक-डग कल चल फिसल बैठे ॥

बिन छुए तुझको तेरी बस आँच से अंगार ,

कितने लोहे मोम-सदृश गल-पिघल बैठे ॥

( धैर्य-करि=संयम के हाथी,मत्त=मतवाला,दादुर-दल=मेंढक समूह,स्निग्ध-पथ=चिकनी राह ,नोक-डग=नुकीले क़दम )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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