कंगन नहीं मिला तो हमने चुरी पकड़ ली ॥

छूटा महानगर तो छोटी पुरी पकड़ ली ॥

कर-कर इलाज हारे पर रोग ना घटा जब ,

अपनी जगह से तिल भर दुःख-कष्ट ना घटा जब ,

औषधियाँ छोड़ हाथों में माधुरी पकड़ ली ॥

ईमानदारियों का पाया सिला बुरा जब ,

अच्छाइयों का बदला अक्सर मिला बुरा जब ,

हमने भी राह धीरे-धीरे बुरी पकड़ ली ॥

लिख-लिख के हमने देखा कुछ भी नहीं हुआ जब ,

हथियार भूलकर भी कोई नहीं छुआ जब ,

तजकर कलम करों में पैनी-छुरी पकड़ ली ॥

( चुरी=चूड़ी , पुरी=नगरी , माधुरी=शराब )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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