न पूछो मुझसे क्या मुझको जनाब बनना है ?

किसी से सह्ल नहीं सबसे सा’ब बनना है ।।

हँसो न गर तो अभी अपनी आर्ज़ू कह दूँ ?

चराग़ हूँ मैं मुझे आफ़्ताब बनना है !!

( सह्ल=सरल , सा’ब=कठिन ,आर्ज़ू=मनोकामना,आफ़्ताब=सूर्य )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *