ठूँठ के , चढ़ती लता लेकर सहारे पूछ मत !!

अंध को करती ग़ज़ालाचश्म इशारे पूछ मत !!

जगमगाते दिन में भी दिलचस्प मंज़र कब मिले ?

स्याह रातों में जो देखे हैं नज़ारे पूछ मत !!

(ठूँठ=पत्रविहीन कटा-टूटा पेड़ ,लता=बेल ,अंध =नेत्रहीन ,ग़ज़ालाचश्म=मृगनयनी)

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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