कुछ पाँव-पाँव तो कुछ गाड़ी से या चढ़े रथ ॥

सब धाम घूम आए , कर डाले सारे तीरथ ॥

पाया यही कि केवल प्रभु-भक्ति है अकारथ ,

होते यथार्थ कर्मों से ही सफल मनोरथ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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