तेरे लिए निचोड़ तप्त रेत बता दूँ ॥

तू कह तो बर्फ जल को लंक जस ही जला दूँ ॥

हो जाए आज भी तू मेरी तो मैं क़सम से ,

लँगड़ा हूँ फिर भी दौड़कर हिरन को हरा दूँ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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