सर्द तनहाई से क्या गर्मागर्म महफ़िल से ॥

क्या तलातुम से और क्या पुरसुकून साहिल से ॥

अब तो लाज़िम है , नागुज़ीर है , ज़रूरी है ;

घर से क्या तुझको मैं अभी निकाल दूँ दिल से ॥

( सर्द तनहाई =ठंडा एकान्त ,महफ़िल =सभा ,तलातुम =बाढ़ ,पुरसुकून साहिल =शांत किनारा , लाज़िम,नागुज़ीर,ज़रूरी =अनिवार्य )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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