अति लघुकथा विशाल उपन्यास बन गई ।।

कविता महान काव्य अनायास बन गई ।।

अभिलाष सत्य तृप्ति का था एक बूँद से ,

तृष्णा अथाह किंतु मृगी-प्यास बन गई !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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