घी तला पापड़ भी मोटी गोल लिट्टी सा लगे ॥

मुँह में रसगुल्ला रखूँ तो सख़्त गिट्टी सा लगे ॥

उसको ले आओ मुझे फिर ख़ाक ज़र हो जाएगी ,

वरना उसके बिन मुझे सोना भी मिट्टी सा लगे ॥

( लिट्टी = एक तरह की बाटी जैसी मोटी रोटी , गिट्टी = पत्थर का टुकड़ा , 

ख़ाक = मिट्टी , ज़र = सोना )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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