झूठ है , झूठ है , झूठ है हाँ मगर ॥

दोस्तों-दुश्मनों सबको कर दो ख़बर ॥

कम से कम मुंतज़िर मेरी मैयत के जो ,

उनसे कह दो कि मैं कल गया रात मर ॥

( मुंतज़िर = प्रतीक्षारत , मैयत = मृत्यु )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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