एक ही जाम में सौ ख़ुम भरी शराब दिखे ॥

एक जुगनूँ में ही दोपहरी आफ़्ताब दिखे ॥

एक मुद्दत से न सोया सो चाहता हूँ मुझे ,

एक ही झपकी में सौ नींद भर का ख़्वाब दिखे ॥

( जाम =प्याला , ख़ुम =मटका, आफ़्ताब =सूर्य , मुद्दत =अर्सा )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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