फ़िदा उसी पे ही दिल होने अड़ा , जान अड़ी !!

बचानी जिससे थी उससे ही तो जा आँख लड़ी !!

हसीं के साथ ही मासूम भी इतना था अदू ,

बजाय सख़्त कराहत के मुहब्बत उमड़ी !!

( अदू = शत्रु ,कराहत = घृणा )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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