हाँ , जंगलों में परिंदे व जानवर देखे ॥

नदी , तलाव में मछली , बतख़ , मगर देखे ॥

जो ढूँढने को चले तेरे शह्र में इंसाँ ,

मिले तमाम फ़रिश्ते , न पर बशर देखे !!

( फ़रिश्ते =देवता  / बशर =इंसान )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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