वो इक शेर है कोई हरगिज़ न आहू ॥

उसे ‘आप’ ही कह न कह उसको तू , ‘तू’ ॥

कभी मेरे क़िस्सों का किरदार था वो ,

मेरी शायरी का रहा है वो मौजू ॥

( आहू=हिरण , किरदार=चरित्र ,शायरी=कविता ,मौजू=विषय )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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