आस्माँ पर सब परिंदे उड़ते अपनी शान से ।।

मछलियाँ पानी में तैरें इक अलग ही आन से ।।

दौड़ें , कूदें , नृत्य भी इंसान के हैं केंचुवी ,

चल सकेगा क्या कभी ये पूरे इत्मीनान से ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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