बुलाए बिन चले आते थे वो पर अब नहीं आते ।।

निमंत्रण भेजने पर भी मेरे घर अब नहीं आते ।।

मैं पहले जैसे ही दाने बिखेरे नित्य बैठूँ पर ,

न जाने क्यों मेरी छत पर कबूतर अब नहीं आते ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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