बिन कोई बल खाए या रस्सी सरीखा ऐंठकर ॥

हाँ खड़े रहकर , पड़े रहकर या उकड़ूँ बैठकर ॥

है बड़ा तू तो रहे ; ऐ पत्रकार ! मैं क्या करूँ ?

सर्वथा मेरे निजी जीवन में मत घुसपैठकर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *