नर्म बिस्तर पर बदलते करवटें रातें हुईं ।।

कहने को उनसे कई लंबी मुलाकातें हुईं ।।

कब बुझाने प्यास को या सींचने के वास्ते ?

सिर्फ़ सैलाबों के मक़्सद से ही बरसातें हुईं ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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