अबके अवसर ना छोडूँगा यार लगाऊँगा ॥

गिन-गिन कर इक बार नहीं सौ बार लगाऊँगा ॥

कबसे मंशा है तुझको अपने रँग रँगने की ,

इस होली में तुझ पर रँग-भण्डार लगाऊँगा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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