181 : ग़ज़ल – ज़हर ला पिलवा

एक तूने क्या दिया धोख़ा मुझे ? दोस्त सब लगने लगे ख़तरा मुझे ॥ मैंने दी सौग़ात में बंदूक तुझको , तूने गोली से दिया उड़वा मुझे ॥ मैं बढ़ाता ही रहा शुह्रत तेरी , और तू करता रहा रुस्वा...Read more