182 : ग़ज़ल – चोली – घाघरा

आज ख़ालीपन मेरा पूरा भरा है ॥ अब कहीं पीला नहीं है बस हरा है ॥ जिसपे मैं क़ुर्बान था आग़ाज़ से ही , वह भी आख़िरकार मुझ पर आ मरा है ॥ उसने मुझको तज के ग़ैर अपना लिया...Read more