मुक्तक : 819 – कोयल की कूक

कोयल की कूक कपि की , किट-किट भी मुझमें है ॥ मुझमें धड़ाम भी तो , चिट-चिट भी मुझमें है ॥ किरदार से सुनो हूँ , शफ़्फाक हंस मैं , हालात के मुताबिक़ , गिरगिट भी मुझमें है ॥ ( किरदार...Read more