184 : ग़ज़ल – मैं फ़िदा था

कैसी भी हो ताती-बासी-पतली-मोटी ॥ भूख में आँखों में नचती सिर्फ़ रोटी ॥ कान काटे है बड़े से भी बड़ों के , उम्रो क़द में छोटे छोटों से वो छोटी ॥ मैं फ़िदा था जिसपे वो जाने क्यों उसने ,...Read more