185 : ग़ज़ल – खलबली

बात अच्छी भी आज उसकी क्यों खली हमको ? जिसकी बकबक भी कल तलक लगी भली हमको ॥ क्या हुआ आज कह रहा हमें वही काँटा , जो चुभन में भी बोलता था गुल-कली हमको ? आज कहता है क्यों...Read more