मुक्तक : 823 – सौभाग्य–लेखन

चाहता था मेरे हाथों में तेरा मन-हाथ होता ॥ स्वर्ग से ले नर्क तक तू मेरे हर छन साथ होता ॥ मिल के सारे काट लेते रास्ते काँटों भरे हम , किन्तु कब सबके लिए सौभाग्य-लेखन माथ होता ? -डॉ. हीरालाल...Read more