चाहता था मेरे हाथों में तेरा मन-हाथ होता ॥

स्वर्ग से ले नर्क तक तू मेरे हर छन साथ होता ॥

मिल के सारे काट लेते रास्ते काँटों भरे हम ,

किन्तु कब सबके लिखा सौभाग्य-लेखन माथ होता ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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