मुक्तक : 824 – चूमेगी कह-कह बालम ॥

हँसके जीने भी नहीं देते जो लोग आज मुझे , मेरे मरने पे मनाएँगे ग़ज़ब का मातम ।। आज लगती है मेरी चाल उन्हें बेढब सी , कल मेरे तौर-तरीक़ों पे चलेगा आलम ।। वक़्त बेशक़ जो मुझे आज दुलत्ती मारे , बात...Read more