ग़ज़ल : 186 – कच्ची-पक्की शराब की बातें ॥

पैर लटके हैं क़ब्र में फिर भी , बस ज़ुबाँ पे शबाब की बातें ।। लोग हँसते हैं सुनके सब ही तो , शेख़चिल्ली-जनाब की बातें ।। दाँत मुँह में नहीं रहे उनके , औ’ न आँतें हैं पेट में...Read more