■ मुक्तक : 828 – अजगर बड़ा ॥

एक चूहे के लिए छोटा सा भी अजगर बड़ा ॥ ज्यों किसी हाथी को भी हो शेर-ए-बब्बर बड़ा ॥ ख़ूब सुन-पढ़ के भी जो हमने कभी माना नहीं , इश्क़ में पड़कर वो जाना , है ये गारतगर बड़ा ॥ ( शेर-ए-बब्बर =...Read more