डसती थी याद दिल को स्याह नाग की तरह ॥

जलता था तन ये जंगलों की आग की तरह ॥

तेरे बिना थी ज़िंदगी बग़ैर आब की ,

इक अंधी बावड़ी , बड़े तड़ाग की तरह ॥

( स्याह=काला ,बग़ैर आब की=जल विहीन ,अंधी बावड़ी=सीढ़ीयुक्त बहुत गहरा कुआँ ,तड़ाग=तालाब ,सरोवर )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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