गीत : 43 – भारी बारिश में धू-धू जल बैठीं ॥

सूखे पत्तों में जैसे झट से आग लग जाए । पतला कागज़ तनिक सी देख लौ सुलग जाए । मेरी जितनी भी कामनाएँ थीं , भारी बारिश में धू-धू जल बैठीं ।। जैसे पानी में होता हाल कच्ची मिट्टी का...Read more