जैसे पानी पर से हाथी चल निकल आया ॥

काले पत्थर में से मीठा जल निकल आया ॥

रात-दिन मैं ढूँढता था जिसको मर-मर कर ,

मेरी मुश्किल का कुछ ऐसे हल निकल आया ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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