गाय को भूखा भेड़िया या शेर होने पे ॥

आबे ज़मज़म में हलाहिल खुला डुबोने पे ॥

आह को लेके क्या मेरी तबाह होना है ?

रूह आमादा मेरी मत करो या ! रोने पे ॥

( आबे ज़मज़म = अमृत जल , हलाहिल = कालकूट विष , रूह = आत्मा , आमादा = उद्धत , तत्पर )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *