हम जबलपुर से यकायक सीधे दिल्ली हो गए ।।

एक चूहे से बिफरती कबरी बिल्ली हो गए ।।

मुल्ला नसरुद्दीन थे लेकिन हुआ फ़ुर्सत में यों ,

मन के लड्डू खाते-खाते शेख़चिल्ली हो गए ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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