कल की चीज़ों की अभी की आज की रक्खी ।।

पाँव की जूती की सिर के ताज की रक्खी ।।

कौन सा बाज़ार है ये जिसमे तितली की ,

बेचने वालों ने क़ीमत बाज़ की रक्खी ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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