■ मुक्तक : 840 – वो सीधा-सादा सा

वो सीधा-सादा सा टेढ़ी निगाह कर बैठा ।। शरीफ़ हो के भी ज़ुर्म-ओ-गुनाह कर बैठा ।। कि अधबने को बनाते-बनाते जाने क्यों , न करके पूरा वो पूरा तबाह कर बैठा ? -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more