ग़ज़ल : 188 ( B) ) : अल्लाह है ना राम

मीर है ना मिर्ज़ा ग़ालिब नाम मेरा है ॥ हाँ ग़ज़ल हर रोज़ कहना काम मेरा है ॥ मैंने कब सीता चुराई फिर भी रावण सा , किसलिए होता बुरा अंजाम मेरा है ? उनके लब पे प्यास का यों...Read more