कैसा वो दर्या जिसमें न होवे है रवानी ?

फिर क्या वो कृष्ण जिसकी न मीरा हो दिवानी ?

वो उम्र जो गुज़रती हो बेइश्क़ यक़ीनन ,

बचपन है या बुढ़ापा है हरगिज़ न जवानी !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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