इश्क़ को मानते हो अगर ज़ुर्म तो ,चाहे हो जाए कुछ ,

मत करो , मत करो ॥

मानते हो इबादत , ख़ुदा तो न फिर ,दुनिया से बेसबब ,

मत डरो , मत डरो ॥

जब न कोई ख़ता , जब न कोई गुनह ,जाने अनजाने भी –

यार करते नहीं ,

फिर कोई लाख माँगे अगर हो सही ,कोई ज़ुर्माना डर ,

मत भरो , मत भरो ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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