मग़्ज़ , दिल , अक़्ल सभी तीन बिछा रक्खे थे ॥

फूल चुन बाग़ से रंगीन बिछा रक्खे थे ॥

तेरे आने की हर इक राह पे मैंने डग-डग ,

अपनी आँखों के दो क़ालीन बिछा रक्खे थे ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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