कब अपने शहर की ही मीठी झील तक गए ॥

दो – चार – छः नहीं हजारों मील तक गए ॥

प्यासे थे इस क़दर कि सब कुएँ , तलाव पी ;

गंगो–जमन , चनाब , मिश्र – नील तक गए ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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