तूने जिसे कहा था आब ; आब ही सुना ॥

मैंने न उसको जह्र या शराब ही सुना ॥

तूने जिसे कहा था सच नहीं है ये , कभी

मैंने भी उसको दिन का एक ख़्वाब ही सुना ॥

तूने जिसे कहा था मुझको पढ़ने ग़ौर से ;

मैंने भी उसको आँख कब ? किताब ही सुना ॥

हिन्दी में तूने मुझको चाँद चाँद जब कहा ;

उर्दू में मैंने उसको माहताब ही सुना ॥

इंसाफ़ के लिए जो तूने रास्ता कहा ;

मैंने भी उसका नाम इन्क़लाब ही सुना ॥

तूने अदब से भी न जब पुकारा तब भी सच ;

मैंने उसे हुज़ूर या जनाब ही सुना ॥

( आब = पानी ,जह्र = विष , माहताब = चाँद , इन्क़लाब = क्रांति , हुज़ूर या जनाब = एक आदर युक्त सम्बोधन )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *