*मुक्त-मुक्तक : 861 – किसी उँगली से अपनी

खड़े हो , बैठ उकड़ूँ या कि औंधे लेट ; पर लिखना ॥ लिखे को काट कर या उसको पूरा मेट कर लिखना ॥ किसी उँगली से अपनी नाम मेरा तुम ज़रूर इक दिन ; मेरे चेहरे पे , सीनो पुश्त पे जी – पेट भर लिखना...Read more

*मुक्त-मुक्तक : 860 – हैं भूखे हम बहुत

नहीं ख़स्ता कचौड़ी के , नहीं तीखे समोसे के ॥ नहीं तालिब हैं हम इमली न ख़्वाहिशमंद डोसे के ॥ न लड्डू , पेड़ा , रसगुल्ला ; न रबड़ी के तमन्नाई ; हैं भूखे हम बहुत लेकिन तुम्हारे एक बोसे के ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

*मुक्त-मुक्तक : 859 – दुश्मन की है तारीफ़

मेरी हर तक्लीफ़ हर मुश्किल का यारों यक-ब-यक , उसने मेरे सामने हल चुटकियों में धर दिया ।। आज उस दुश्मन की है तारीफ़ का मंशा बहुत , काम जिसने आज जानी दोस्त वाला कर दिया ।। थी बहुत जिददो जहद...Read more

ग़ज़ल : 216 – काश कोई कमाल हो जाए ॥

काश कोई कमाल हो जाए ।। अम्न दिल में बहाल हो जाए ।।1।। गर वो सबके जवाब देता है ; एक मेरा सवाल हो जाए ।।2।। जब नहीं खोदने को कुछ होता ; नख ही मेरा कुदाल हो जाए ।।3।।...Read more

ग़ज़ल : 215 – दे सका ना खिलौने

दे सका ना खिलौने रे बच्चों को मैं ॥ अपने नन्हें खिलौनों से बच्चों को मैं ॥ चाहता था कि दूँ चाँद-तारे उन्हें , हाय ! बस दे सका ढेले बच्चों को मैं ॥ माँगते थे वो रोटी तो देता...Read more

ग़ज़ल : 214 – हैं अभी दीपक

हैं अभी दीपक ; कभी तो आफ़्ताब होंगे ॥ गर नहीं हम आज तो कल कामयाब होंगे ॥ दुरदुराओ मत हमें काग़ज़ के फूलों सा ; देखना इक दिन हमीं अर्क़े गुलाब होंगे ॥ आज तक तो आबे ज़मज़म हैं...Read more