उनके दिल में कर न तू बसने की तैयारी ।।

उनकी नज़रों में कोई पहले ही है तारी ।।1।।

जंगलों की आग बन जा या तू बड़वानल ,

वो तुझे समझेंगे फिर भी सिर्फ़ चिंगारी ।।2।।

इससे बचके रहना ही इसका इलाज होता ,

मत लगा दिल को मोहब्बत जैसी बीमारी ।।3।।

रख खुली खिड़की औ’ रोशनदान वरना दम –

घोंट के रख देगी तेरा चार दीवारी ।।4।।

रह्न रख दे अपनी सारी मिल्कियत लेकिन ,

छोड़ना मत क़र्ज़ की ख़ातिर तू खुद्दारी ।।5।।

तेरी मर्ज़ी कर ले अपने साथ तू धोख़ा ,

मत कभी अपने वतन से करना ग़द्दारी ।।6।।

साथ उनके मौत सिर पर ज़ुल्फ जैसी थी ,

उनके बिन तो ज़िंदगी भी बोझ है भारी ।।7।।

( तारी = छाया हुआ ,बड़वानल = समुद्र के अंदर जलती हुई आग ,रह्न = गिरवी ,मिल्कियत = धन-संपत्ति ,खुद्दारी = स्वाभिमान ,ज़ुल्फ = केश , बाल )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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