गीत : 47 – तुम क्या जानो दुख पायल का ?

तुम क्या जानो दुख पायल का , तुमको तो छन – छन से मतलब ? चूड़ी कितनी चिटके – टूटे , तुमको बस खन – खन से मतलब ? तुमको बस अच्छे लगते वो मेंढक जो टर्राते हैं सच । गाने वालों  से ज़्यादा...Read more

ग़ज़ल : 224 – मैं इश्क़ में मानूँ

वो दैर जाता कभी दिखे तो कभी हरम को ॥ भुला के आता हूँ मैक़दे में मैं अपने ग़म को ॥ वो मानता कब ख़ुदा किसी को सिवा ख़ुदा के , मैं इश्क़ में मानूँ अपना रब अपने ही सनम...Read more

ग़ज़ल : 223 – तुम मेरी बाँहों में कुछ पल

या मेले में सँग मेरे कल्लोलो तो ।। या एकांत में कांधे सर धर रो लो तो ।।1।। सुनकर तुमको बहरापन मेरा जाता , क्यों चुप हो ? संकेतों से ही बोलो तो ।।2।। क्यों रहते हो कुछ दिन से...Read more

ग़ज़ल : 222 – वो परिंदे

जितना आँखों से उसको हटाता गया ।। उतना दिल में वो मेरे समाता गया ।।1।। यों वो आया था देने तसल्ली मगर , जाते – जाते मुझे फिर रुलाता गया ।।2।। क्या कहूँ रहनुमा ही मेरी राह में , जाल...Read more