ग़ज़ल : 226 – अजब कर रहा है ॥

न जाने वो क्या किस सबब कर रहा है ? मगर इतना तै है गज़ब कर रहा है ॥ वही जाने क्या उसका मक़्सद है लेकिन , लगे है कि वो कुछ अजब कर रहा है ॥ वो ख़ुद अपने...Read more

■ गीत : 48 – माँगता हूँ

माँगता हूँ जो वही साथी मुझे देना ।। और जितना चाहूँ उतना ही मुझे देना ।। तितलियाँ माँगूँ तो देना तितलियाँ लाकर । चीटियाँ माँगूँ तो देना चीटियाँ लाकर । सौंपना चूहा ही यदि चूहा मँगाऊँ मैं , मत कभी...Read more

ग़ज़ल : 225 – हीरा हूँ मैं

हीरा हूँ मैं वो मुझको अच्छे से जानता है ॥ फिर भी हमेशा मुझमें नर्मी तलाशता है ॥ जिस कान ने न मुझको सुनने की ली क़सम है , मेरा गला उसी को आवाज़ मारता है ॥ वह कबसे आस्माँ...Read more