मुझसे बंदर को कहे कूदूँ न मैं , उछलूँ न मैं !

दर खुला पिंजरे का रख बोले कभी निकलूँ न मैं !

बर्फ़ हूँ यह जानकर दुश्मन मेरा मुझको पकड़ ,

धूप में रखकर ये कहता है मुझे पिघलूँ न मैं !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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