किसी की चीख़ और ना फिर

किसी का मौन रोकेगा ॥

न हिन्दू सिक्ख ईसाई

न जैन औ’ जौन रोकेगा ॥

जब ऊग आएँगे मेरी पीठ

पर दो पंख उड़ने को ,

मुझे छूने से फिर आकाश

बोलो कौन रोकेगा ॥

( जौन = यवन या मुसलमान )

डॉ. हीरालाल प्रजापति

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