ग़ज़ल : 234 – कर गया हैराँ…….

दर्द को चुपचाप ही हमने सहा ; आँख से आँसू न कोई भी बहा ॥ हम जो सुनना चाहते थे उसने वो , ना ज़ुबाँ से औ’ न आँखों से कहा ॥ बुझ गए हम उसको देते देते आँच ,...Read more

*मुक्त-मुक्तक : 871 – इश्क़ की तैयारियां

छोड़कर आसानियाँ सब माँगता दुश्वारियाँ वो ॥ चाहता सेहत नहीं क्यों चाहता बीमारियाँ वो ॥ इक पुराना बेवफ़ा बस भूलकर बैठा ही है इत ; उठके उत करने लगा नए इश्क़ की तैयारियां वो ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more