गलता बारिश में कच्ची मिट्टी वाला ढेला हूँ ॥

नेस्तोनाबूद शह्र हूँ मैं उजड़ा मेला हूँ ॥

देख आँखों से अपनी आके मेरी हालत को ,

तेरे जाने के बाद किस क़दर अकेला हूँ ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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